ज़्यादातर लोग बजट इसलिए नहीं बना पाते क्योंकि बजट का मतलब समझा जाता है — हर खर्च लिखना। वो कुछ दिन चलता है और फिर छूट जाता है। इससे कहीं आसान तरीका है: खर्च गिनने के बजाय, सैलरी आते ही उसे हिस्सों में बाँट दीजिए। एक बार सेट करने के बाद यह अपने आप चलता रहता है।
हिस्सा 1 — ज़रूरतें (लगभग 50%)
किराया, राशन, बिजली-पानी, आने-जाने का खर्च, बच्चों की फीस और सारी EMI। यह वो खर्च है जो रुक नहीं सकता। ₹50,000 की in-hand सैलरी पर यह लगभग ₹25,000 होना चाहिए। अगर यह 60% से ऊपर जा रहा है — खासकर EMI की वजह से — तो असली दिक्कत बचत नहीं, कर्ज़ है, और पहले उसे ठीक करना होगा।
हिस्सा 2 — बचत और निवेश (कम से कम 20%)
यह हिस्सा सबसे पहले निकलना चाहिए, महीने के अंत में नहीं। ₹50,000 पर लगभग ₹10,000। SIP या RD की तारीख सैलरी वाली तारीख के 1-2 दिन बाद रख दें ताकि यह अपने आप कट जाए। जो पैसा account में दिखता नहीं, वो खर्च भी नहीं होता — यही पूरे सिस्टम की जान है।
अपनी असली in-hand सैलरी निकालिएहिस्सा 3 — शौक (लगभग 30%)
बाहर खाना, shopping, घूमना, OTT — ₹50,000 पर लगभग ₹15,000। यह हिस्सा जान-बूझकर रखा गया है। जो बजट सारे शौक बंद कर देता है वो दो महीने में टूट जाता है, ठीक वैसे ही जैसे बहुत सख़्त diet। शौक के लिए तय पैसा होने से guilt भी नहीं होती और हद भी नहीं टूटती।
हिस्सा 4 — साल में आने वाले खर्च
यह हिस्सा ज़्यादातर लोग भूल जाते हैं, और यही बचत तोड़ता है। बीमा premium, त्योहार, शादी-ब्याह के लिफ़ाफ़े, गाड़ी की service, घर की मरम्मत — ये हर महीने नहीं आते, पर आते ज़रूर हैं। साल भर के ऐसे सारे खर्च जोड़िए और 12 से भाग दीजिए; उतनी रकम हर महीने एक अलग account में डाल दीजिए। इससे त्योहार या शादी का खर्च आपकी SIP नहीं तुड़वाएगा।
इसे टिकाऊ कैसे बनाएँ
- सैलरी वाले account से बचत अपने आप ट्रांसफ़र होने की व्यवस्था करें — इच्छाशक्ति पर भरोसा न करें।
- बचत वाले account का ATM/UPI साथ न रखें, ताकि पैसा निकालना थोड़ा मुश्किल हो।
- हर increment का आधा हिस्सा सीधे SIP में बढ़ा दें — खर्च की आदत बनने से पहले।
- साल में एक बार पूरा हिसाब दोबारा देखें; किराया या EMI बदले तो हिस्से भी बदलें।
यह तरीका इसलिए चलता है क्योंकि इसमें रोज़ का अनुशासन नहीं चाहिए — बस महीने में एक बार का सही बँटवारा चाहिए। बाकी काम automation कर देता है।
देखिए आपका पैसा कितना संभला हुआ हैआगे पढ़ें: एक्स्ट्रा पैसा कहाँ invest करेंFrequently asked questions
- सैलरी को कैसे बाँटना चाहिए?
- एक आसान बँटवारा है 50-30-20: 50% ज़रूरतों पर (किराया, राशन, EMI), 30% शौक पर, और 20% बचत-निवेश पर। साथ ही साल में आने वाले खर्चों (बीमा, त्योहार, शादी) के लिए हर महीने अलग रकम रखें ताकि वो अचानक बजट न बिगाड़ें।
- बजट बनाना मुश्किल लगता है, आसान तरीका क्या है?
- हर खर्च लिखने के बजाय सैलरी आते ही पैसे को हिस्सों में बाँट दें और बचत अपने आप कटने की व्यवस्था कर दें। खर्च गिनने वाला बजट अक्सर टूट जाता है; हिस्सों वाला सिस्टम एक बार सेट करने के बाद अपने आप चलता है।
- अगर EMI ही सैलरी का बड़ा हिस्सा ले रही हो तो?
- अगर ज़रूरतें और EMI मिलकर 60% से ऊपर जा रही हैं, तो पहले सबसे महँगे कर्ज़ (credit card, personal loan) को कम करने पर ध्यान दें। ऊँचे ब्याज का कर्ज़ चुकाना एक तरह का guaranteed return है, और उसके बिना बचत टिक नहीं पाती।