धनतेरस और दिवाली पर लाखों परिवार पुराने गहने दुकान पर ले जाकर नए बनवाते हैं। ज़्यादातर लोग इसे 'बदलना' समझते हैं, बेचना नहीं। लेकिन टैक्स के हिसाब से पुराने सोने के बदले नया गहना लेना भी बिक्री ही है। पुराने गहने की जो क़ीमत दुकान आपको देती है, वही आपकी बिक्री की रक़म है, चाहे हाथ में एक रुपया न आए।
गहना एक capital asset है
सोने के गहने, सिक्के और bar टैक्स क़ानून में capital asset हैं। बेचने पर जो मुनाफ़ा होता है वह capital gain है। कितना टैक्स लगेगा, यह दो बातों पर टिका है: आपने सोना कितने समय तक रखा, और उसकी असली लागत क्या थी।
कितने समय पर कौन सा टैक्स
- 24 महीने से ज़्यादा रखा सोना long-term माना जाता है। इसके मुनाफ़े पर 12.5% टैक्स लगता है, indexation के बिना, और ऊपर से 4% cess। यह नियम 23 जुलाई 2024 या उसके बाद की बिक्री पर लागू है।
- 24 महीने या उससे कम रखा सोना short-term है। इसका मुनाफ़ा आपकी बाक़ी आमदनी में जुड़ता है और आपके slab की दर से टैक्स लगता है।
- शेयर और equity mutual fund पर मिलने वाली ₹1.25 लाख की छूट सोने पर नहीं मिलती। सोने के पूरे long-term मुनाफ़े पर टैक्स बनता है।
Long-term gain पर टैक्स Section 112 (नए Income-tax Act, 2025 में section 197) के तहत लगता है। अगर आपकी बाक़ी आमदनी basic exemption limit से कम है, तो resident व्यक्ति उस बची हुई limit को इस मुनाफ़े के सामने इस्तेमाल कर सकता है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए आपने 2018 में गहने ₹65,000 में खरीदे थे (making charge और GST मिलाकर)। इस धनतेरस दुकान उनके बदले ₹2,40,000 की क़ीमत लगाती है। मुनाफ़ा ₹1,75,000 हुआ। 12.5% की दर से टैक्स ₹21,875 और 4% cess ₹875, यानी कुल ₹22,750। बहुत से लोग यहाँ ₹1.25 लाख की छूट घटाकर सिर्फ़ ₹6,500 मान लेते हैं, जो सोने पर ग़लत है। और अगर यही गहना दो साल के अंदर बेचा जाता और आप 30% slab में होते, तो इसी मुनाफ़े पर ₹54,600 बनता।

लागत कैसे साबित करें
- पुराना bill सबसे अच्छा सबूत है। उसमें दी गई पूरी रक़म, making charge और टैक्स समेत, आपकी लागत मानी जा सकती है।
- विरासत या शादी में मिले गहनों की लागत वही होती है जो पिछले मालिक की थी, और holding period भी उन्हीं की ख़रीद से गिना जाता है।
- 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदे गए सोने के लिए उस तारीख़ की fair market value को लागत माना जा सकता है।
- Bill न हो तो registered valuer की report सबसे भरोसेमंद रास्ता है। अंदाज़े से लिखी लागत पर सवाल उठ सकता है।
दुकान से नक़द पैसा लेने से पहले
अगर आप गहने बेचकर पैसा ले रहे हैं, तो किसी एक व्यक्ति से एक दिन में, एक लेन-देन या एक मौक़े पर ₹2 लाख या उससे ज़्यादा नक़द लेना मना है। यह Section 269ST का नियम है (नए Income-tax Act, 2025 में section 186)। नियम तोड़ने पर penalty पैसा लेने वाले पर लगती है, यानी आप पर, दुकान पर नहीं। बड़ी रक़म bank transfer या cheque से ही लें।
टैक्स बचाने के वैध रास्ते
- Long-term मुनाफ़े वाले सोने की पूरी बिक्री रक़म से रहने के लिए घर खरीदने पर Section 54F के तहत छूट मिल सकती है, शर्तों के साथ।
- बेचने से पहले देखें कि सोना 24 महीने पूरे कर चुका है या नहीं। कुछ हफ़्ते रुकने से short-term की दर हटकर long-term की दर लग सकती है।
- Capital gain होने पर ITR-1 नहीं चलेगा, ITR-2 भरना होगा। Return में यह बिक्री दिखाना न भूलें।
Hallmark न होने पर भी आप पुराना गहना बेच या बदल सकते हैं; hallmark का नियम बेचने वाले jeweller पर है, आप पर नहीं। गहने के bill में कौन-कौन से charge जुड़ते हैं, यह हमारी making charges वाली गाइड में है।
आज का सोने का भाव देखेंकौन सा ITR form भरना है, जानेंFrequently asked questions
- पुराने गहने बदलने पर भी टैक्स लगता है क्या?
- हाँ। पुराने सोने के बदले नया गहना लेना भी बिक्री मानी जाती है। पुराने गहने की लगाई गई क़ीमत आपकी बिक्री की रक़म है, और मुनाफ़े पर capital gains टैक्स बनता है।
- सोना कितने साल बाद बेचने पर कम टैक्स लगता है?
- 24 महीने से ज़्यादा रखने पर यह long-term हो जाता है और 12.5% व 4% cess लगता है। उससे पहले बेचने पर मुनाफ़ा आपके slab की दर से टैक्स होता है।
- क्या सोने पर ₹1.25 लाख की छूट मिलती है?
- नहीं। ₹1.25 लाख की छूट सिर्फ़ listed शेयर और equity mutual fund के long-term gain पर है। सोने के गहनों पर यह छूट नहीं मिलती।
- विरासत में मिले सोने की लागत क्या मानें?
- पिछले मालिक की लागत, और holding period भी उन्हीं की ख़रीद की तारीख़ से। 1 अप्रैल 2001 से पहले का सोना हो तो उस दिन की fair market value ली जा सकती है।