IPO में शेयर allot हुए और listing पर अच्छा भाव मिला, तो अगला सवाल tax का होता है। इस मुनाफ़े पर कितना tax बनेगा, किस धारा में, और किस रक़म पर? यह लेख सिर्फ़ tax का हिसाब समझाता है: rate कैसे तय होता है, gain की गिनती में क्या घटता है और क्या नहीं, और listing घाटे में हो तो loss कैसे काम आता है। शेयर बेचें या रखें, यह फ़ैसला आपका है; यहाँ कोई निवेश सलाह नहीं है।
पहले यह तय कीजिए: gain short-term है या long-term
Listed शेयर अगर 12 महीने या उससे कम रखकर बेचे गए, तो वे short-term capital asset हैं और मुनाफ़ा short-term capital gain (STCG) कहलाता है। 12 महीने से ज़्यादा रखकर बेचे, तो long-term capital gain (LTCG)। गिनती ख़रीद (acquisition) की तारीख़ से शुरू होकर बिक्री से एक दिन पहले तक चलती है। IPO में शेयर allotment से आपके होते हैं, इसलिए गिनती allotment की तारीख़ से होती है, application या listing की तारीख़ से नहीं। Allotment और listing की तारीख़ अलग होती हैं, इसलिए 12 महीने का हिसाब listing की तारीख़ से लगाना ग़लत हो सकता है।
एक बात और: अगर उसी company के शेयर आपने बाद में market से भी ख़रीदे हैं, तो demat में रखे शेयरों के लिए FIFO (first in, first out) नियम लगता है। यानी जो शेयर demat में पहले आए, वही पहले बिके माने जाते हैं।
Rate: नया Act और पुरानी धाराएँ
1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act, 2025 लागू है। इस तारीख़ के बाद की बिक्री (tax year 2026-27) पर listed equity शेयर का STCG section 196 में और LTCG section 198 में आता है। 31 मार्च 2026 तक की बिक्री पर पुराने Act (1961) की section 111A और 112A लगती थीं। दोनों में rate एक जैसे हैं, बस धारा का नंबर बदला है:
111A का 20% और 112A का 12.5% rate, साथ में ₹1,25,000 की सीमा, 23 जुलाई 2024 या उसके बाद की बिक्री पर लागू हैं। इन rates पर 4% Health and Education Cess अलग से जुड़ता है।
STCG: 12 महीने तक रखकर बेचा, बिक्री पर STT लगा
- नया Act (2025)
- Section 196
- पुराना Act (1961)
- Section 111A
- Tax
- पूरे gain पर 20%
LTCG: 12 महीने से ज़्यादा रखकर बेचा
- नया Act (2025)
- Section 198
- पुराना Act (1961)
- Section 112A
- Tax
- साल के कुल ऐसे LTCG में ₹1,25,000 से ऊपर के हिस्से पर 12.5%
| Gain | नया Act (2025) | पुराना Act (1961) | Tax |
|---|---|---|---|
| STCG: 12 महीने तक रखकर बेचा, बिक्री पर STT लगा | Section 196 | Section 111A | पूरे gain पर 20% |
| LTCG: 12 महीने से ज़्यादा रखकर बेचा | Section 198 | Section 112A | साल के कुल ऐसे LTCG में ₹1,25,000 से ऊपर के हिस्से पर 12.5% |
Source: Income-tax Act, 1961, section 111A: 23 जुलाई 2024 से पहले 15%, उस दिन या बाद 20%
Cess के अलावा बहुत ऊँची income वालों पर surcharge भी लगता है, पर 111A और 112A वाले gain पर surcharge की ऊपरी सीमा 15% है; 25% और 37% वाली दरें इस gain पर नहीं लगतीं।
Gain की गिनती: क्या घटता है, क्या नहीं
- Cost of acquisition: IPO में आपने प्रति शेयर जो भाव चुकाया (issue price), वही आपकी लागत है। Employee या shareholder discount मिला हो, तो लागत वही है जो आपने असल में चुकाई।
- बिक्री से जुड़े ख़र्च घटते हैं: brokerage, commission जैसे जो ख़र्च सिर्फ़ शेयर बेचने के लिए हुए हों, वे gain से घटाए जा सकते हैं। नीचे के उदाहरणों में broker के charges इसी तरह घटाए गए हैं।
- STT नहीं घटता: बिक्री पर कटा Securities Transaction Tax (STT) capital gain की गिनती में घटाया नहीं जा सकता। वह आपकी जेब से जाता है, पर taxable gain कम नहीं करता।
STT की दर: exchange पर delivery में शेयर बेचने पर, बेचने वाले से बिक्री की रक़म का 0.1% कटता है। ख़रीदने वाले पर भी 0.1% लगता है, पर IPO allotment exchange पर हुई ख़रीद नहीं है, इसलिए allotment के समय STT नहीं कटता; IPO वाले शेयर पर सिर्फ़ बेचते वक़्त का 0.1% लगता है। Finance Act, 2026 ने 1 अप्रैल 2026 से futures और options का STT बढ़ाया, पर delivery वाले शेयरों का STT नहीं बढ़ा।
Listing के दिन बेचना intraday नहीं है, क्योंकि शेयर IPO में मिले थे और demat से delivery में बेचे गए। यह बात, और GMP व timing की चर्चा, Jio IPO वाले लेख में विस्तार से है।
Listing day पर शेयर कैसे बिकते हैं: Jio IPO का पूरा हिसाबउदाहरण 1: ₹15,000 का एक retail lot
मान लीजिए किसी IPO का issue price ₹100 है और एक lot 150 शेयर का है, यानी ₹15,000। Listing के दिन आपने सारे शेयर ₹125 पर बेच दिए। ये भाव सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए हैं। Brokerage, DP charge और exchange charges (GST के साथ) broker के हिसाब से बदलते हैं; यहाँ उनका अनुमान ₹25 लिया है।
Charges अनुमान हैं; असली रक़म आपके contract note में होगी। Tax आपकी बाक़ी income के slab से नहीं, सीधे 20% पर बनता है।
बिक्री: 150 × ₹125
- रक़म
- ₹18,750
लागत: 150 × ₹100
- रक़म
- ₹15,000
बिक्री के charges (अनुमान)
- रक़म
- ₹25
STCG: 18,750 − 15,000 − 25
- रक़म
- ₹3,725
Tax: 3,725 × 20%
- रक़म
- ₹745
Cess: 745 × 4%
- रक़म
- ₹29.80
कुल tax
- रक़म
- ₹774.80
STT: 18,750 × 0.1% (gain से नहीं घटा)
- रक़म
- ₹18.75
Tax, STT और charges के बाद हाथ में मुनाफ़ा: 3,750 − 774.80 − 18.75 − 25
- रक़म
- ₹2,931.45
| हिसाब | रक़म |
|---|---|
| बिक्री: 150 × ₹125 | ₹18,750 |
| लागत: 150 × ₹100 | ₹15,000 |
| बिक्री के charges (अनुमान) | ₹25 |
| STCG: 18,750 − 15,000 − 25 | ₹3,725 |
| Tax: 3,725 × 20% | ₹745 |
| Cess: 745 × 4% | ₹29.80 |
| कुल tax | ₹774.80 |
| STT: 18,750 × 0.1% (gain से नहीं घटा) | ₹18.75 |
| Tax, STT और charges के बाद हाथ में मुनाफ़ा: 3,750 − 774.80 − 18.75 − 25 | ₹2,931.45 |
अगर यही शेयर allotment से 12 महीने बाद बेचे जाते और (सिर्फ़ तुलना के लिए) भाव फिर भी ₹125 होता, तो ₹3,725 का gain LTCG होता। उस साल आपका कुल LTCG ₹1,25,000 से कम रहे, तो इस पर कोई tax नहीं बनता। पर 12 महीने बाद भाव क्या होगा, यह कोई नहीं जानता; यह तुलना सिर्फ़ नियम दिखाती है, कोई अनुमान नहीं।
एक राहत: section 196(2) के मुताबिक़, अगर resident व्यक्ति की STCG के अलावा बाक़ी income basic exemption limit से कम है, तो जितनी कमी हो, उतने STCG पर tax नहीं लगता। Student या homemaker जैसे मामलों में छोटे lot का tax इससे घट सकता है।
उदाहरण 2: ₹1 लाख का बड़ा allotment
अब मान लीजिए कई lots मिलाकर आपको 1,000 शेयर ₹100 पर मिले, यानी ₹1,00,000। बिक्री फिर ₹125 पर, और charges का अनुमान फिर ₹25 (असली रक़म आपके broker के rate पर निर्भर है)।
- बिक्री 1,000 × ₹125 = ₹1,25,000; STT 0.1% = ₹125।
- STCG = 1,25,000 − 1,00,000 − 25 = ₹24,975।
- Tax 24,975 × 20% = ₹4,995; cess 4% = ₹199.80; कुल ₹5,194.80।
- 12 महीने बाद बेचते और उस साल कोई और LTCG न होता, तो ₹24,975 का LTCG ₹1,25,000 की सीमा में आ जाता और कोई tax नहीं लगता।
- पर अगर उसी साल equity mutual funds से ₹1,10,000 का LTCG पहले से है, तो कुल LTCG 1,10,000 + 24,975 = ₹1,34,975। सीमा से ऊपर ₹9,975 पर 12.5% = ₹1,246.875, cess 4% = ₹49.875, कुल ₹1,296.75 (क़रीब ₹1,297)।
सबसे ज़रूरी बात आख़िरी बिंदु में है: ₹1,25,000 की छूट हर शेयर या हर IPO पर अलग नहीं मिलती। यह पूरे साल के सारे listed शेयरों, equity funds और business trust units के ऐसे LTCG पर एक साथ मिलती है।
उदाहरण 3: listing घाटे में हुई
उदाहरण 1 वाला ₹15,000 का lot listing के दिन ₹88 के भाव पर खुला और आपने बेच दिया। बिक्री 150 × ₹88 = ₹13,200। Short-term capital loss = 13,200 − 15,000 − 25 (charges का अनुमान) = −₹1,825। STT ₹13.20 फिर भी कटता है, पर loss की गिनती में नहीं जुड़ता; इसलिए जेब से कुल ₹1,838.20 गए, जबकि tax के लिए loss ₹1,825 है।
मान लीजिए उसी tax year में उदाहरण 2 वाला ₹24,975 का STCG भी हुआ। तब यह loss पहले gain में से घटाया जाएगा: 24,975 − 1,825 = ₹23,150 पर tax बनेगा। 20% = ₹4,630, cess ₹185.20, कुल ₹4,815.20। बिना set-off के tax ₹5,194.80 था, यानी ₹379.60 कम।
Loss के नियम: set-off और carry forward
- Short-term capital loss उसी साल के STCG और LTCG, दोनों के सामने set off हो सकता है।
- Long-term capital loss सिर्फ़ LTCG के सामने set off होता है, STCG के सामने नहीं।
- Capital loss को salary, ब्याज या किराए जैसी दूसरी income में से घटाया नहीं जा सकता।
- जो loss उसी साल न घट पाए, उसे अगले 8 साल के लिए carry forward किया जा सकता है, और आगे भी सिर्फ़ capital gains से ही घटेगा (long-term loss सिर्फ़ LTCG से)।
- शर्त: loss वाले साल का return section 139(1) की due date तक भरा हो। देर से भरे return में capital loss carry forward नहीं होता।
इसलिए अगर साल में सिर्फ़ IPO पर loss हुआ है और कोई gain नहीं, तब भी ITR समय पर भरकर उसमें loss दिखाना फ़ायदे का है। पिछली IPO listings में कितनी बार loss हुआ, इसका record हमने नीचे वाले लेख में दिया है।
IPO में loss होता है? 35 IPO की listing का हिसाबLTCG वाली दर की एक शर्त: STT
Section 198 (पुराने Act में 112A) की 12.5% वाली दर के लिए equity शेयर पर STT बिक्री और ख़रीद (acquisition), दोनों पर चुकाया होना चाहिए। केंद्र सरकार कुछ acquisitions को notification से इस शर्त से बाहर रख सकती है (section 198(5), पुराने Act में 112A(4))। IPO allotment पर STT नहीं कटता, इसलिए यह छूट आपके मामले पर लागू होती है या नहीं, यह CBDT की Notification No. 60/2018 से तय होता है। Return भरते समय यह बात अपने CA या tax software से एक बार ज़रूर मिला लीजिए। STCG वाली section 196 में सिर्फ़ बिक्री पर STT की शर्त है।
Return में यह कहाँ दिखेगा
Listing gain या loss, दोनों return में capital gains वाले हिस्से में जाते हैं, salary के साथ नहीं। Broker का capital gains statement (tax P&L) शेयर-वार ख़रीद और बिक्री की तारीख़, भाव और charges देता है; return भरने से पहले उसे allotment की तारीख़ से मिला लीजिए। आपको कौन-सा ITR form भरना होगा, यह नीचे के tool से देखिए।
अपने भाव पर tax देखिए: Capital gains tax calculatorSTT, DP charge और बाक़ी ख़र्च निकालिए: Brokerage calculatorकौन-सा ITR form भरें: ITR form checkerShares और mutual funds पर capital gains के बाक़ी नियम (debt funds, holding period की तुलना) English गाइड में हैं, और साल भर की कई बिक्री एक साथ जोड़नी हो तो free Excel sheet काम आएगी।
Capital gains tax on stocks and mutual funds (English गाइड)Capital gains calculator Excel: free sheetयह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है, निवेश या tax सलाह नहीं। अगर आप NRI हैं, या शेयरों की trading आपके लिए business मानी जाती है, तो नियम बदल सकते हैं; ऐसे मामलों में CA से बात कीजिए।
अगर आप चाहते हैं कि CA आपका return भरे (capital gains, विदेशी assets या notice हो तो काम का), तो TaxBuddy जैसी paid services assisted filing करती हैं; e-Filing portal वाला तरीका मुफ़्त है। (affiliate link: आप sign up करें तो PaisaTools को कुछ मिल सकता है; इससे हमारी बात नहीं बदलती)
Frequently asked questions
- IPO listing gain पर कितना tax लगता है?
- Allotment से 12 महीने के अंदर बेचा तो यह STCG है: पूरे gain पर 20% tax और उस tax पर 4% cess (Income-tax Act, 2025 की section 196; पुराने Act में 111A)। उदाहरण: ₹3,725 के gain पर ₹745 tax और ₹29.80 cess। बिक्री पर 0.1% STT अलग से कटता है।
- क्या IPO listing gain पर slab rate से tax लगता है?
- नहीं। STT वाली बिक्री का STCG section 196 में सीधे 20% पर लगता है, आपकी बाक़ी income के slab से नहीं। अपवाद: अगर resident व्यक्ति की STCG के अलावा बाक़ी income basic exemption limit से कम है, तो जितनी कमी हो, उतने STCG पर tax नहीं लगता।
- 12 महीने किस तारीख़ से गिने जाते हैं?
- Holding period acquisition की तारीख़ से गिना जाता है, और IPO में शेयर allotment से आपके होते हैं। इसलिए गिनती allotment की तारीख़ से होती है, listing या application की तारीख़ से नहीं। 12 महीने से ज़्यादा रखने पर ही gain long-term बनता है।
- क्या STT gain से घटा सकते हैं?
- नहीं। Brokerage, commission जैसे बिक्री के ख़र्च घटते हैं, पर STT की रक़म capital gain की गिनती में घटाई नहीं जा सकती।
- IPO के loss पर tax में क्या होता है?
- Short-term capital loss उसी साल के STCG और LTCG के सामने set off होता है। बचा loss 8 साल तक carry forward हो सकता है, पर सिर्फ़ तब जब loss वाले साल का return section 139(1) की due date तक भरा हो। यह loss salary जैसी दूसरी income के सामने set off नहीं होता।
- ₹1.25 लाख की LTCG छूट हर IPO पर अलग मिलती है?
- नहीं। यह सीमा पूरे साल के listed शेयरों, equity mutual funds और business trust units के कुल LTCG पर एक बार मिलती है। उसके ऊपर के हिस्से पर 12.5% और cess लगता है।