घुटने की तकलीफ़ अचानक नहीं आती, पर सर्जरी का फ़ैसला अक्सर अचानक लेना पड़ता है। और उसी हफ़्ते पता चलता है कि हेल्थ पॉलिसी होते हुए भी अस्पताल काउंटर पर अपनी जेब से एक बड़ी रकम देनी है।
नीचे बिल के हिस्से अलग-अलग दिए हैं, फिर वह वजह जिसकी वजह से इंश्योरेंस वाले परिवार भी भरते हैं, और अंत में एक पूरा उदाहरण। शहर और अस्पताल से दाम बदलते हैं, ढाँचा वही रहता है।
बिल किन हिस्सों से बनता है
- सर्जन और एनेस्थीसिया की फ़ीस - निजी अस्पताल में यह बिल का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।
- इम्प्लांट यानी घुटने का कृत्रिम जोड़ - धातु और डिज़ाइन से दाम बदलता है।
- कमरा और ICU - सर्जरी के बाद आम तौर पर तीन से पाँच दिन भर्ती रहना पड़ता है।
- दवाइयाँ, जाँच, ऑपरेशन थिएटर का चार्ज और फ़िज़ियोथेरेपी के शुरुआती सेशन।
- छुट्टी के बाद की फ़िज़ियोथेरेपी - छह से बारह हफ़्ते, और यह अलग से चलती रहती है।
सरकारी और ट्रस्ट के अस्पतालों में यही सर्जरी बहुत कम में होती है, कई जगह आयुष्मान भारत या राज्य की योजना के तहत मुफ़्त भी। निजी अस्पताल में एक घुटने का पूरा पैकेज आम तौर पर ढाई से पाँच लाख रुपये के बीच बैठता है, और दोनों घुटने एक साथ करवाने पर कुल रकम दो अलग सर्जरी से कम पड़ती है क्योंकि भर्ती और थिएटर का खर्च एक बार लगता है।

इम्प्लांट का दाम
घुटने के इम्प्लांट के दाम पर सरकार ने ऊपरी सीमा तय कर रखी है, इसलिए यह हिस्सा मनमाना नहीं हो सकता। धातु के हिसाब से दाम बदलता है, और अस्पताल आपको विकल्प बताने के लिए बाध्य है। बिल में इम्प्लांट की लाइन अलग से माँगिए - कौन सी कंपनी, कौन सा मॉडल, और उस पर क्या दाम लगा है।
इंश्योरेंस होते हुए भी पैसे क्यों लगते हैं
- वेटिंग पीरियड: जोड़ बदलने की सर्जरी ज़्यादातर पॉलिसियों में शुरू के दो से चार साल तक कवर नहीं होती, चाहे प्रीमियम भरा जा रहा हो।
- कमरे की लिमिट: पॉलिसी में कमरे का किराया सीमित है और आपने उससे महँगा कमरा लिया, तो सिर्फ़ कमरे का अंतर नहीं - सर्जन की फ़ीस समेत पूरा बिल उसी अनुपात में कटता है।
- इम्प्लांट पर सब-लिमिट: कुछ पॉलिसियाँ इम्प्लांट के लिए अलग ऊपरी सीमा रखती हैं।
- non-medical सामान: दस्ताने, सिरिंज, बेल्ट, ब्रेस जैसी चीज़ों की एक लंबी सूची होती है जिसका पैसा कोई पॉलिसी नहीं देती।
- को-पे: उम्रदराज़ सदस्यों की पॉलिसी में अक्सर हर क्लेम का दस से बीस प्रतिशत आपको ही भरना होता है।
- छुट्टी के बाद की फ़िज़ियोथेरेपी: post-hospitalisation की तय अवधि के बाद वाले सेशन आम तौर पर अपनी जेब से जाते हैं।
इसी वजह से चार लाख के पैकेज पर पाँच लाख की पॉलिसी होते हुए भी परिवार अक्सर चालीस हज़ार से एक लाख रुपये तक अपनी जेब से देता है - को-पे, non-medical सामान, कमरे की लिमिट से हुई कटौती और छुट्टी के बाद की फ़िज़ियोथेरेपी मिलाकर। पॉलिसी का कागज़ यह सब पहले से लिखकर बताता है; पढ़ा सर्जरी के हफ़्ते जाता है।
सर्जरी से पहले ये चार काम करें
- पॉलिसी के wording में joint replacement का वेटिंग पीरियड और room rent limit वाली लाइन ढूँढिए - यही दो लाइनें सबसे ज़्यादा पैसा तय करती हैं।
- अस्पताल से लिखित estimate लीजिए जिसमें इम्प्लांट, कमरा और थिएटर अलग-अलग दिखें।
- cashless की मंज़ूरी सर्जरी से पहले लिखित में लीजिए, और उसमें कटने वाली रकम भी पूछ लीजिए।
- non-medical सामान की सूची अस्पताल से पहले ही माँग लीजिए, ताकि छुट्टी वाले दिन का बिल चौंकाए नहीं।
Frequently asked questions
- भारत में घुटना बदलवाने का खर्च कितना है?
- निजी अस्पताल में एक घुटने का पूरा पैकेज आम तौर पर ढाई से पाँच लाख रुपये के बीच बैठता है। सरकारी और ट्रस्ट अस्पतालों में यह बहुत कम, और सरकारी योजना के तहत कई जगह मुफ़्त भी होता है।
- दोनों घुटने एक साथ करवाना सस्ता पड़ता है?
- कुल रकम दो अलग सर्जरी से कम पड़ती है, क्योंकि भर्ती, थिएटर और जाँच का खर्च एक ही बार लगता है। पर यह फ़ैसला पैसे का नहीं, आपकी सेहत और डॉक्टर की सलाह का है।
- क्या हेल्थ इंश्योरेंस घुटने की सर्जरी कवर करता है?
- हाँ, पर ज़्यादातर पॉलिसियों में जोड़ बदलने की सर्जरी पर शुरू के दो से चार साल का वेटिंग पीरियड लगता है। अपनी पॉलिसी के wording में यही लाइन सबसे पहले देखिए।
- room rent limit से बिल पर क्या फ़र्क़ पड़ता है?
- अगर आपने पॉलिसी की तय सीमा से महँगा कमरा लिया, तो कई पॉलिसियों में सिर्फ़ कमरे का अंतर नहीं कटता - सर्जन की फ़ीस समेत पूरा बिल उसी अनुपात में कम मंज़ूर होता है।
- non-medical सामान क्या होता है?
- दस्ताने, सिरिंज, बेल्ट, ब्रेस जैसी चीज़ें जिनकी एक तय सूची होती है और जिनका पैसा पॉलिसी नहीं देती। छुट्टी वाले दिन का चौंकाने वाला बिल अक्सर यही होता है।