अस्पताल का बिल, गाड़ी का एक्सीडेंट, नौकरी का अचानक जाना - पैसा आज चाहिए। ऐसे वक़्त में सबसे पहले जो रास्ता दिखता है, वह अक्सर सबसे महँगा होता है, क्योंकि वही सबसे तेज़ दिखता है।
नीचे सातों रास्ते सबसे सस्ते से सबसे महँगे के क्रम में हैं, हर एक के साथ यह भी कि पैसा कितनी देर में हाथ आता है। क्रम याद रखिए - घबराहट में लोग नीचे से ऊपर चलते हैं।

1. कंपनी से सैलरी एडवांस
सबसे कम इस्तेमाल होने वाला और अक्सर सबसे सस्ता रास्ता। कई कंपनियों में एक या दो महीने की सैलरी एडवांस का नियम होता है, जो अगली तनख़्वाहों से कटती है और जिस पर ब्याज नहीं लगता। पैसा एक से तीन दिन में आता है। HR से पूछने में कोई नुक़सान नहीं है।
2. पीएफ़ एडवांस
यह क़र्ज़ नहीं, आपका ही पैसा है - इसलिए इस पर ब्याज नहीं लगता। इलाज, शादी, पढ़ाई, घर जैसी तय वजहों के लिए Form 31 से निकाला जाता है, और हर वजह की अपनी सीमा होती है। बीमारी वाले दावे सबसे जल्दी निपटते हैं। पैसा आम तौर पर तीन से सात दिन में खाते में आता है।
पीएफ़ का पैसा निकालने का पूरा तरीक़ा3. एफ़डी पर लोन
एफ़डी तोड़िए मत, उस पर लोन लीजिए। बैंक आम तौर पर एफ़डी की रकम का नब्बे प्रतिशत तक देता है, और ब्याज आपकी एफ़डी की दर से एक से दो प्रतिशत ऊपर लगता है - यानी बाज़ार के हर दूसरे लोन से सस्ता। एफ़डी चलती रहती है, ब्याज भी मिलता रहता है। ज़्यादातर बैंकों में यह उसी दिन हो जाता है।
4. म्यूचुअल फ़ंड या शेयरों पर लोन
फ़ंड बेचे बिना उन्हें गिरवी रखकर ओवरड्राफ़्ट मिलता है। इक्विटी फ़ंड पर आम तौर पर मूल्य का आधा और डेट फ़ंड पर उससे ज़्यादा। ब्याज सिर्फ़ उतने दिन का लगता है जितने दिन पैसा इस्तेमाल हुआ, और बेचने पर लगने वाला कैपिटल गेन टैक्स बचा रहता है। एक दिन में हो जाता है।
5. गोल्ड लोन
घर के सोने पर उसी दिन पैसा मिल जाता है और सिबिल स्कोर की ज़्यादा भूमिका नहीं होती। नियम के मुताबिक़ सोने की क़ीमत का पचहत्तर प्रतिशत तक मिलता है। बैंक की दर एनबीएफ़सी से कम होती है, इसलिए दुकान के सामने वाली पहली एनबीएफ़सी पर रुक मत जाइए।
गोल्ड लोन कैसे लें और कितना मिलेगा6. पर्सनल लोन
कोई चीज़ गिरवी नहीं रखनी पड़ती, इसलिए ब्याज ऊपर रहता है और सिबिल स्कोर से दर तय होती है। एक से तीन दिन में पैसा आता है। प्रोसेसिंग फ़ीस और समय से पहले चुकाने पर लगने वाला चार्ज दोनों पहले पूछ लीजिए - ये दरों में नहीं दिखते।
7. क्रेडिट कार्ड से नकद
यही वह रास्ता है जो सबसे तेज़ है और सबसे भारी पड़ता है। एटीएम से नकद निकालते ही निकाली गई रकम का ढाई से साढ़े तीन प्रतिशत फ़ीस लगती है, और ब्याज उसी दिन से चालू हो जाता है - खरीदारी पर मिलने वाले पचास दिन यहाँ नहीं मिलते। महीने की दर तीन प्रतिशत के आसपास होती है, यानी सालाना छत्तीस से बयालीस प्रतिशत। बीस हज़ार रुपये तीन महीने रखने पर दो हज़ार से ऊपर सिर्फ़ फ़ीस और ब्याज में चले जाते हैं।
जो नहीं करना चाहिए
- बिना सिबिल, बिना कागज़ और बिना केवाईसी के तुरंत लोन देने वाले ऐप - इनमें से ज़्यादातर रिज़र्व बैंक के नियमों से बाहर चलते हैं और वसूली के लिए फ़ोन की contact list का इस्तेमाल करते हैं।
- एक कार्ड का बिल दूसरे कार्ड से भरना - इससे रकम घटती नहीं, सिर्फ़ महँगी होती है।
- पीपीएफ़ या एनपीएस समय से पहले तोड़ना, जब एफ़डी या फ़ंड पर लोन मिल सकता हो।
- इमरजेंसी में बीमा पॉलिसी सरेंडर करना - सरेंडर वैल्यू शुरू के सालों में भरे गए प्रीमियम से काफ़ी कम होती है।
और जैसे ही यह वाला मौक़ा निकल जाए, तीन से छह महीने के खर्च का इमरजेंसी फ़ंड बनाना शुरू कीजिए। ऊपर के सातों रास्तों में सबसे सस्ता आठवाँ रास्ता वही है।
इमरजेंसी फ़ंड कितना बड़ा होना चाहिएFrequently asked questions
- इमरजेंसी में सबसे सस्ता पैसा कहाँ से मिलता है?
- कंपनी से मिलने वाला सैलरी एडवांस और पीएफ़ एडवांस - दोनों पर ब्याज नहीं लगता। उसके बाद एफ़डी पर लोन, जिसकी दर आपकी अपनी एफ़डी की दर से एक-दो प्रतिशत ही ऊपर होती है।
- क्या एफ़डी तोड़ना बेहतर है या उस पर लोन लेना?
- आम तौर पर लोन बेहतर है। तोड़ने पर जुर्माना लगता है और अब तक का ब्याज भी कम दर से मिलता है, जबकि लोन लेने पर एफ़डी चलती रहती है।
- क्रेडिट कार्ड से नकद निकालना कितना महँगा है?
- निकालते ही ढाई से साढ़े तीन प्रतिशत फ़ीस, और ब्याज उसी दिन से - खरीदारी वाला ब्याज-मुक्त समय नकद पर नहीं मिलता। सालाना हिसाब छत्तीस से बयालीस प्रतिशत तक बैठता है।
- पीएफ़ एडवांस का पैसा कितने दिन में आता है?
- आम तौर पर तीन से सात दिन। बीमारी की वजह से किए गए दावे सबसे तेज़ निपटते हैं, बशर्ते केवाईसी और बैंक खाता पहले से जुड़े हों।
- बिना सिबिल स्कोर के तुरंत लोन देने वाले ऐप सुरक्षित हैं?
- ज़्यादातर नहीं। बिना कागज़ और बिना केवाईसी के लोन देने वाले ज़्यादातर ऐप नियमों से बाहर चलते हैं। सोने पर लोन या एफ़डी पर लोन उसी दिन मिल जाता है और नियम के दायरे में होता है।